आसमान जितने सितारे हैं तेरी महफ़िल में
अपनी तक़दीर का ही कोई सितारा न हुआ
लोग रो-रो के भी इस दुनिया में जी लेते हैं
एक हम हैं कि हंसे भी तो गुज़ारा न हुआ.
हवा बन कर...
हवा बन कर बिखरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
मेरे जीने या मरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
उसे तो अपनी खुशियों से;
ज़रा भी फुर्सत नहीं मिलती;
मेरे ग़म के उभरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
उस शख्स की यादों में;
मैं चाहे रोते रहूँ लेकिन;
मेरे ऐसा करने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है।
tumse pyar kar ke main deewano mein shamil hua,
pal pal teri yad mein jalkar parwano mein shamil hua,
jis anjam ke hone se darta tha usi ka sheekar hua,
aakhir teri barat mein barati bankar shamil hua…
वो मेहँदी वाले हाथ मुझे दिखा के रोये;
अब मैं हूँ किसी और की हूँ मुझे ये
बता के रोये;
पहले कहते थे
कि नहीं जी सकते तेरे बिन;
आज फिर वही बात वो दोहरा के रोये;
कैसे कर लूं उनकी मोहब्बत पे शक यारों;
वो भरी महफ़िल में मुझे गले लगा के रोये।