हर तरफ हर जगह...
हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी;
फिर भी तन्हाईयों का शिकार आदमी;
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ;
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी;
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ;
हर नए दिन नया इतज़ार आदमी;
हर तरफ भागते दौड़ते का शिकार आदमी;
हर तरफ आदमी का शिकार आदमी;
ज़िंदगी का मुक़द्दर सफ़र दर सफ़र;
आखिरी सांस तक बेक़रार आदमी।
भीड़ भाड़ को छोड़ आए हैं बस तन्हाई भाई है.
वहां बहुत बेचैनी भोगी यहां खुमारी छाई है.
वो सवाल अब यहां नहीं हैं जिनके उत्तर मुश्किल थे.
जितनी हमने इच्छा की थी उतनी राहत पाई है.
#मन्दिर :european_castle: की #घण्टी :bell: बजा #बजा कर भी #थक :disappointed_relieved: चुका हूं... ना जाने उसके #दिल :heartpulse: में मेरे #प्यार :couple_with_heart: की #घंटी :bell: कब बजेगी?
Bekhudi ki zindagi hum jiya nahi karte,
Jaam dusro se chheenkar hum piya nhi karte
Unko mohabbat hai toh aakar izhaar karen,
Peecha hum bhi kisi ka kiya nahi karte..!!
ज़िंदगी को प्यार हम आपसे ज्यादा नहीं करते;
किसी पे ऐतबार आपसे ज्यादा नहीं करते;
आप जी सके मेरे बिन तो अच्छी बात है;
हम जी लेंगे आपके बिन ये वादा नहीं करते।