जो गुमां करे इस नक्श पे, वो अक्स भी एक खाक है
जिस सादगी में नूर हो, वो हुस्न ही मेहताब है
जिस नजर में खुमार हो,जो जिगर से जांनिसार हो
जिसे जलके ही करार हो, वो इश्क ही आफताब है
Swee2
उलझी हुई दुनीयां को पाने
की जिद्द करो,
जो ना हो अपना उसे अपनाने की जिद्द करो,
इस समंदर में तुफान बहुत आते है तो क्या हुआ,
इसके साहिल पे घर बनाने की जिद्द करो...
khan
कही ईसा, कहीं मौला,
कहीं भगवान रहते है;
हमारे हाल से शायद सभी अंजान रहते हैं;
चले आये, तबीयत आज
भारी सी लगी अपन
सुना था आपकी बस्ती में कुछ इंसान
रहते है।
बहुत महंगे किराए के मकाँ से;
चलो आओ चलें अब इस जहां से;
यूँ ही तुम थामे रहना हाथ मेरा;
हमे जाना है आगे आसमां से;
ये तुम ही हो मेरे हमराह वरना;
मेरे पैरों में दम आया कहाँ से;
मेरी आँखों से क्या ज़ाहिर नहीं था;
मैं तेरा नाम क्या लेता जुबां से।
तुझे पाने की इसलिए जिद्द नहीं करता,
कि तुझे खोने को दिल नहीं करता,
तु मिलता है तो इसलिए नजरें नहीं उठाते,
कि फिर नजरें हटाने को दिल नहीं करता,
दिल की बात इसलिए तुझ से नहीं करता,
कि तेरा दिल दुखाने को दिल नहीं करता,
ख्वाबो में इसलिए तुझको नहीं सजाते,
कि फिर निंद से जागने को दिल नहीं करता।
क्या फ़र्क है दोस्ती और मोहब्बत में,
रहते तो दोनों दिल में ही हैं लेकिन फ़र्क तो है;
बरसों बाद मिलने पर दोस्ती सीने से लगा लेती है,
और मोहब्बत नज़र चुरा लेती है।
ए रात सोने दे...
ए रात सोने दे यूं तंग ना किया कर;
बेकार सवालों में पाबंद ना किया कर;
इस के सिवा और भी ज़माने के काम हैं;
तु मेरे ख्यालात बे-ढंग ना किया कर;
दुनियाँ में और लोग भी बस्ते हैं तन्हा;
तु सिर्फ मेरे साथ ही जंग न किया कर;
ए रात सोने दे यूँ तंग ना किया कर;
मज़बूत हूँ, पर इतना भी नहीं हूँ;
दुनिया के सभी ग़म मेरे संग ना किया कर;
ए रात सोने दे यूँ तंग न किया कर।