हवा बन कर...
हवा बन कर बिखरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
मेरे जीने या मरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
उसे तो अपनी खुशियों से;
ज़रा भी फुर्सत नहीं मिलती;
मेरे ग़म के उभरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
उस शख्स की यादों में;
मैं चाहे रोते रहूँ लेकिन;
मेरे ऐसा करने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है।
उलझी हुई दुनीयां को पाने
की जिद्द करो,
जो ना हो अपना उसे अपनाने की जिद्द करो,
इस समंदर में तुफान बहुत आते है तो क्या हुआ,
इसके साहिल पे घर बनाने की जिद्द करो...
khan
यार था गुलज़ार था...
यार था गुलज़ार था बाद-ए-सबा थी मैं न था;
लायक़-ए-पा-बोस-ए-जाँ क्या हिना थी, मैं न था;
हाथ क्यों बाँधे मेरे छल्ला अगर चोरी हुआ;
ये सरापा शोख़ी-ए-रंग-ए-हिना थी, मैं न था;
मैंने पूछा क्या हुआ वो आप का हुस्न्-ओ-शबाब;
हँस के बोला वो सनम शान-ए-ख़ुदा थी, मैं न था;
मैं सिसकता रह गया और मर गये फ़रहाद-ओ-क़ैस;
क्या उन्हीं दोनों के हिस्से में क़ज़ा थी, मैं न था।
Pagli मेरी :gift_heart: Äαshiqi_तो :calling:Jioसे भी Բαšт है, Ęκ बार :cupid:Ďįℓ♡ मे उतर के तो देख :couple: बीना Network :couple_with_heart: के ही, तुझेे Unlimited याद आऊंगा . .
यूनानी मिश्र और रोमी सब मिट गये जहाँ से;
अब तक मगर हैं बाकी नाम-ओ-निशा हमारा;
कुछ बात हैं के हसती मिटती नहीं हमारी;
सदियों रहा हैं दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा।
तेरे हाथ थाम :couple: कर ज़िन्दगी :couple_with_heart: की राहो पर चलना :walking: चाहता हूँ, फिर ख़ुशी :grinning: मिले या दुःख :pensive: ये मेरा नसीब :innocent: है.
वो पानी की बूंद है, जो आँखों से बह जाये....
आँसू तो वो है, जो तड़प के आँखों में ठहर जाये....
वो प्यार ही क्या जो लफ्जों में बयान हो....
प्यार वो है जो आँखों से नजर आये.....