Aaj khuda ne phir puchha tera hasta huya
chehra udas kyun hai?
teri ankhoin me pyas kyun hai?
Jinke pas tere liye waqt hi nhi wohi tere
liye khas kyun hai???
जर्जर हौसला मरम्मत मांगता है;
मुश्किल वक्त हिम्मत मांगता है;
उम्र भर नेकी न
की गयी मगर;
अब बुढ़ापे में जन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
वफ़ा के सौदे में वो सितमगर मुझसे;
शर्त में बेशर्त मोहब्बत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
काफ़िर बेटों का वो खुदा-परस्त बाप;
औलादों के लिए मन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
एक रुपया नहीं निकलता उनकी जेब
से;
जिनके लिए माँ का दिल बरकत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
दोनों जहाँ देके वो...
दोनों जहाँ देके वो समझे ये ख़ुश रहा;
यां आ पड़ी ये शर्म की तकरार क्या करें;
थक-थक के हर मक़ाम पे दो चार रह गये;
तेरा पता न पायें तो नाचार क्या करें;
क्या शमा के नहीं है हवाख़्वाह अहल-ए-बज़्म;
हो ग़म ही जांगुदाज़ तो ग़मख़्वार क्या करें।
Translation:
नाचार=जिनका बस ना चले,
हवाख़्वाह=शुभचिंतक,
अहल-ए-बज़्म=महफिल वाले,
जांगुदा=जान घुलाने वाला।
रिश्ते बनाना इतना आसान होता है
जैसे 'मिट्टी' से 'मिट्टी' पर 'मिट्टी' लिखना ॥
लेकिन...
रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल होता है
जैसे 'पानी' पर 'पानी' से 'पानी' लिखना ॥
आँखों के इंतज़ार को दे कर हुनर चला गया;
चाहा था एक शख़्स को जाने किधर चला गया;
दिन की वो महफिलें गईं, रातों के रतजगे गए;
कोई समेट कर मेरे शाम-ओ-सहर चला गया;
झोंका है एक बहार का रंग-ए-ख़याल यार भी;
हर-सू बिखर-बिखर गई ख़ुशबू जिधर चला गया;
उसके ही दम से दिल में आज धूप
भी चाँदनी भी है;
देके वो अपनी याद के शम्स-ओ-क़मर चला गया;
कूचा-ब-कूचा दर-ब-दर कब से भटक रहा है दिल;
हमको भुला के राह वो अपनी डगर चला गया।
कितना सोचा था मैंने नए रिश्ते बना के भूल जाउंगी तुम्हे :point_right: लेकिन में ये भूल गई थी रिश्ते बदल सकते है, साँसे नहीं, जो की तुम हो :kissing_heart:
जब तुम्हारा जादू चलेगा
सब तरफ होगी बहार
हर कोई होगा बेक़रार
तुम्हारा इंतज़ार ……………
ना कहीं होगा वैर
ना कहीं होगी घृणा
बस प्यार ही प्यार
तुम्हारा इंतज़ार ……………
हम रोज़ प्रेम दिवस मनाएँग
प्यास वो दिल की...
प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं;
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं;
बेरुख़ी इस से बड़ी और भला क्या होगी;
एक मुद्दत से हमें उस ने सताया भी नहीं;
रोज़ आता है दर-ए-दिल पे वो दस्तक देने;
आज तक हमने जिसे पास बुलाया भी नहीं;
सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने;
वो फ़साना जो कभी हमने सुनाया भी नहीं;
तुम तो शायर हो क़तील और वो इक आम सा शख़्स;
उस ने चाहा भी तुझे और जताया भी नहीं।