ए रात सोने दे...
ए रात सोने दे यूं तंग ना किया कर;
बेकार सवालों में पाबंद ना किया कर;
इस के सिवा और भी ज़माने के काम हैं;
तु मेरे ख्यालात बे-ढंग ना किया कर;
दुनियाँ में और लोग भी बस्ते हैं तन्हा;
तु सिर्फ मेरे साथ ही जंग न किया कर;
ए रात सोने दे यूँ तंग ना किया कर;
मज़बूत हूँ, पर इतना भी नहीं हूँ;
दुनिया के सभी ग़म मेरे संग ना किया कर;
ए रात सोने दे यूँ तंग न किया कर।
मैंने कोशिश के बाद उसे भुला दिया;
उसकी यादों को सीने से मिटा दिया;
एक दिन फिर उसका पैगाम आया;
लिखा था मुझे भूल जाओ और;
मुझे हर लम्हा फिर याद दिला दिया।
कही ईसा, कहीं मौला,
कहीं भगवान रहते है;
हमारे हाल से शायद सभी अंजान रहते हैं;
चले आये, तबीयत आज
भारी सी लगी अपन
सुना था आपकी बस्ती में कुछ इंसान
रहते है।
यह ना थी हमारी क़िस्मत, कि विसाल-ए-यार होता;
अगर और जीते रहते, यही इंतज़ार होता;
तेरे वादे पर जाएँ हम, तो यह जान झूठ जाना;
कि ख़ुशी से मर ना जाते, अगर ऐतबार होता।
रिश्ते बनाना इतना आसान होता है
जैसे 'मिट्टी' से 'मिट्टी' पर 'मिट्टी' लिखना ॥
लेकिन...
रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल होता है
जैसे 'पानी' पर 'पानी' से 'पानी' लिखना ॥
शायरी की कदर को सिर्फ आशिक समझता है,
धरती की प्यास को सिर्फ बादल समझता है,
उन की मोहब्बत को मेरा दिल समझता है,
मेरी मोहब्बत के एहसासो को मेरा रब समझता है…