यार था गुलज़ार था...
यार था गुलज़ार था बाद-ए-सबा थी मैं न था;
लायक़-ए-पा-बोस-ए-जाँ क्या हिना थी, मैं न था;
हाथ क्यों बाँधे मेरे छल्ला अगर चोरी हुआ;
ये सरापा शोख़ी-ए-रंग-ए-हिना थी, मैं न था;
मैंने पूछा क्या हुआ वो आप का हुस्न्-ओ-शबाब;
हँस के बोला वो सनम शान-ए-ख़ुदा थी, मैं न था;
मैं सिसकता रह गया और मर गये फ़रहाद-ओ-क़ैस;
क्या उन्हीं दोनों के हिस्से में क़ज़ा थी, मैं न था।
जो गुमां करे इस नक्श पे, वो अक्स भी एक खाक है
जिस सादगी में नूर हो, वो हुस्न ही मेहताब है
जिस नजर में खुमार हो,जो जिगर से जांनिसार हो
जिसे जलके ही करार हो, वो इश्क ही आफताब है
Hum Hamesha Se Hi Yehi Khade Hai "galib"
Tumhe Jawab Dene Ke liya
Bas Faraq Itna Hai Ke
Tumhe Parakh Nahi Hai Apnao Ki
Aur Hum Gair Ko B Salam Kya Karte Hai
Me नहीं जानता Kエ :heart_eyes: क्या Googlε हैं, क्या Facεbook हैं, Mε :kissing_heart: तो बस エtna जानता हूँ :sparkling_heart: Tuღ मेरे Wんatsapp हो, और Mε तुम्हारा Status हूँ.