जज़्बात बहकते है जब तुमसे मिलती हूँ
अरमान मचलते है जब तुमसे मिलती हूँ...
साथ हम दोनों का कोई बर्दाश्त नहीं करता
सब हमसे जलते हैं जब तुमसे मिलती हूँ...
आँखों से तुम जाने क्या क्या कह देते हो
तूफ़ान से चलते हैं जब तुमसे मिलती हूँ...
हाथो से हट मिलते हैं होंठो से होंठ
दिल से दिल मिलते हैं जब तुमसे मिलती हूँ...
आहो में बह जाती है तन्हाई कि हर रात
कई शिकवे दिल में रहते हैं जब तुमसे मिलती हूँ..
Posted my swee2
वो मेहँदी वाले हाथ मुझे दिखा के रोये;
अब मैं हूँ किसी और की हूँ मुझे ये
बता के रोये;
पहले कहते थे
कि नहीं जी सकते तेरे बिन;
आज फिर वही बात वो दोहरा के रोये;
कैसे कर लूं उनकी मोहब्बत पे शक यारों;
वो भरी महफ़िल में मुझे गले लगा के रोये।
दर्द जब हद से गुजर जाता हूँ तो रो लेता हूँ;
जब किसी से कुछ कह
नहीं पता तो रो लेता हूँ;
यूँ तो मेला हैं चारों तरफ हमारे, लोगों का मगर;
जब कोई अपना नजर नहीं आता तो रो लेता हूँ।
मेरी आँखों में...
मेरी आँखों में आँसू आए ना होते;
अगर वो हमें देखकर मुस्कुराए ना होते;
सोचता हूँ अक्सर तन्हाई में मैं;
मेरी ज़िंदगी में काश वो आए ना होते;
ना तड़पते हम उनके लिए इतना;
दिल ने ख़्वाब अगर उनके सजाए ना होते;
ना टूट कर बिखरता मैं इस कदर;
अगर वो मेरे दिल में अपना घर बसाए ना होते।