नया दर्द एक और दिल में जगा कर चला गया;
कल फिर वो मेरे शहर में आकर चला गया;
जिसे ढूंढ़ता रहा मैं लोगों की भीड़ में;
मुझसे वो अपने आप को छुपा कर चला गया।
एक मुद्दत से मेरे हाल से बेगाना है;
जाने ज़ालिम ने किस बात का बुरा माना है;
मैं जो जिंदगी हूँ तो वो भी हैं
अना का कैदी;
मेरे कहने पर कहाँ उसने चले आना है।
कहाँ से लाऊ हुनर उसे मनाने का;
कोई जवाब नहीं था उसके रूठ जाने का;
मोहब्बत में सजा मुझे ही मिलनी थी;
क्यूंकी जुर्म मैंने किया था उससे दिल लगाने का।
रेगिस्तान भी :desert: हरे :deciduous_tree::herb::shamrock: हो जाते है, जब अपने :sunglasses: साथ :raising_hand::raised_hands: अपने भाई :two_men_holding_hands: खड़े हो जाते है ।।
दिल मेरा जिस से बहलता...
दिल मेरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला;
बुत के बने तो मिले अल्लाह का बंदा ना मिला;
बज़्म-ए-याराँ से फिरी बाद-ए-बहारी मायूस;
एक सर भी उसे आमादा-ए-सौदा न मिला;
गुल के ख़्वाहाँ तो नज़र आये बहुत इत्रफ़रोश;
तालिब-ए-ज़मज़म-ए-बुलबुल-ए-शैदा न मिला;
वाह क्या राह दिखाई हमें मुर्शद ने;
कर दिया काबे को गुम और कलीसा न मिला;
सय्यद उट्ठे जो गज़ट ले के तो लाखों लाये;
शैख़ क़ुरान दिखाता फिरा पैसा न मिला।