कठिन है राह-गुज़र...
कठिन है राह-गुज़र थोड़ी देर साथ चलो;
बहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी देर साथ चलो;
तमाम उम्र कहाँ कोई साथ देता है;
ये जानता हूँ मगर थोड़ी दूर साथ चलो;
नशे में चूर हूँ मैं भी तुम्हें भी होश नहीं;
बड़ा मज़ा हो अगर थोड़ी दूर साथ चलो।
दिल तो तोड ही दिया आपने,
अब चिता भी जला देना ,
कफ़न ना मिले तो ,
ये दुपट्टा ही ओढ़ा देना ,
कोई पुछे कि बिमारी क्या थी हमें ,
तो नजरे झुका के मोहब्बत बता देन.
क्या फ़र्क है दोस्ती और मोहब्बत में,
रहते तो दोनों दिल में ही हैं लेकिन फ़र्क तो है;
बरसों बाद मिलने पर दोस्ती सीने से लगा लेती है,
और मोहब्बत नज़र चुरा लेती है।
हम दोस्ती इस कदर निभायेगें, अगर ना मिली नौकरी तो बिलकुल नहीं घबरायेगें, बस स्टैण्ड के पास चाय की दूकान लगायेगें, तुम चाय बनाना हम चाय-चाय चिल्लायेगें, जो कमाई होगी उससे अपना जीवन साथ-साथ बितायेगें |
:couple:साथ :walking:चलने के लिए साथी चाहिए :sob: आंसू रोकने के लिए :innocent:मुस्कान चाहिए :heart: जिंदा रहने के लिए जिंदगी चाहिए और जिंदगी जीने के लिए :point_right::princess:आप चाहिए !!
✵➥ बेवफा तेरा :bride_with_veil: मासुम ☜ चेहरा भुल जाने के ➣ काबिल :negative_squared_cross_mark: नहीं ••
तु :bride_with_veil: बहुत ➪ खुबसूरत :ok_hand_tone1:है लेकिन दिल :heart_decoration: लगाने के काबिल नहीं..||•||:ribbon::two_women_holding_hands::flags:||•||
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र
के हम है;
रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम है;
पहले हर चीज़
थी अपनी मगर अब लगता है;
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के
हम है;
वक़्त के साथ है मिट्टी का सफ़र सदियों से;
किसको मालूम कहाँ के हैं, किधर के हम हैं;
चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफ़िर का नसीब;
सोचते रहते हैं किस राहग़ुज़र के हम है।
कितनी अजीब बात है ना जब तू मेरे पास थी तो,
हर दम ये सोचता था की क्या में तेरी कदर नहीं करता
और आज तू मेरे पास नहीं है तो है तो ये एहसास होता है की,
कदर तो हमेशा से थी मगर तुजे न खोने के यकीन ने अँधा कर दिया था.