बहुत महंगे किराए के मकाँ से;
चलो आओ चलें अब इस जहां से;
यूँ ही तुम थामे रहना हाथ मेरा;
हमे जाना है आगे आसमां से;
ये तुम ही हो मेरे हमराह वरना;
मेरे पैरों में दम आया कहाँ से;
मेरी आँखों से क्या ज़ाहिर नहीं था;
मैं तेरा नाम क्या लेता जुबां से।
रिश्ते बनाना इतना आसान होता है
जैसे 'मिट्टी' से 'मिट्टी' पर 'मिट्टी' लिखना ॥
लेकिन...
रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल होता है
जैसे 'पानी' पर 'पानी' से 'पानी' लिखना ॥
कितनी अजीब बात है ना जब तू मेरे पास थी तो,
हर दम ये सोचता था की क्या में तेरी कदर नहीं करता
और आज तू मेरे पास नहीं है तो है तो ये एहसास होता है की,
कदर तो हमेशा से थी मगर तुजे न खोने के यकीन ने अँधा कर दिया था.
Katil Gunah Karke Zamane Main Reh Gaye,
Ek Hum The Ke Ashq Bahane Main Reh Gaye.
Patharon Ka Jawab To Hum Bhi De Sakte The,
Lekin Hum Dil Ke Aiane Ko Bachne Main Reh Gaye.
दिल मेरा जिस से बहलता...
दिल मेरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला;
बुत के बने तो मिले अल्लाह का बंदा ना मिला;
बज़्म-ए-याराँ से फिरी बाद-ए-बहारी मायूस;
एक सर भी उसे आमादा-ए-सौदा न मिला;
गुल के ख़्वाहाँ तो नज़र आये बहुत इत्रफ़रोश;
तालिब-ए-ज़मज़म-ए-बुलबुल-ए-शैदा न मिला;
वाह क्या राह दिखाई हमें मुर्शद ने;
कर दिया काबे को गुम और कलीसा न मिला;
सय्यद उट्ठे जो गज़ट ले के तो लाखों लाये;
शैख़ क़ुरान दिखाता फिरा पैसा न मिला।
रौशन जमाल-ए-यार...
रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम;
देखा हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम;
हैरत गुरुर-ए-हुस्न से शोखी से इज़तराब;
दिल ने भी तेरे सीख लिए हैं चलन तमाम;
अल्लाह रे हुस्न-ए-यार की खूबी के खुद-ब-खुद;
रंगीनियों में डूब गया पैरहान तमाम;
देख तो हुस्न-ए-यार की जादुई निगाहें;
बेहोश एक नज़र में हुई अंजूमन तमाम।
Aaj khuda ne phir puchha tera hasta huya
chehra udas kyun hai?
teri ankhoin me pyas kyun hai?
Jinke pas tere liye waqt hi nhi wohi tere
liye khas kyun hai???