तुम यहाँ धरती पर लकीरें
खींचते हो;
हम वहाँ अपने लिये नये आसमान ढूंढते हैं;
तुम बनाते जाते हो पिंजड़े पे पिंजड़ा;
हम अपने पंखों में नयी उड़ान ढूंढते हैं।
इस दिल को अगर तेरा एहसास नहीं होता;
तो दूर भी रह कर के यूँ पास नहीं होता;
इस दिल ने तेरी चाहत कुछ ऐसे बसा ली है;
एक लम्हा भी तुझ बिन कुछ खास नहीं होता।
तु ही मिल जाए मुझे बस इतना ही काफी है;
मेरी हर सांस ने बस ये ही दुआ मांगी है;
जाने क्यूँ दिल खिंचा चला जाता है तेरी तरफ;
क्या तूने भी मुझे पाने की दुआ मांगी है।
हर तरफ हर जगह...
हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी;
फिर भी तन्हाईयों का शिकार आदमी;
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ;
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी;
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ;
हर नए दिन नया इतज़ार आदमी;
हर तरफ भागते दौड़ते का शिकार आदमी;
हर तरफ आदमी का शिकार आदमी;
ज़िंदगी का मुक़द्दर सफ़र दर सफ़र;
आखिरी सांस तक बेक़रार आदमी।
Mujhe Dekh Muskuraya Na Karo, Raaton Ko Khawab Main Aakar Jagaya Na Karo, Mohabbat Hai Yaa Hai Nafrat Humse Saaf Saaf Kehdo, Yuh Khamosh Reh Kar Dil Humara Jalaya Na Karo.
मेरी दोस्त बड़ी वो प्यारी है, फूलो की जैसी निर्मल है,
सूरज की जैसी किरने है, बाते भी उस की निर्मल है,
पूजा की जैसी थाली है, चेहरे पर उस के लाली है,
दोस्ती उस की सच्ची है, वो दिल की बोहुत अच्छी है….
यार था गुलज़ार था...
यार था गुलज़ार था बाद-ए-सबा थी मैं न था;
लायक़-ए-पा-बोस-ए-जाँ क्या हिना थी, मैं न था;
हाथ क्यों बाँधे मेरे छल्ला अगर चोरी हुआ;
ये सरापा शोख़ी-ए-रंग-ए-हिना थी, मैं न था;
मैंने पूछा क्या हुआ वो आप का हुस्न्-ओ-शबाब;
हँस के बोला वो सनम शान-ए-ख़ुदा थी, मैं न था;
मैं सिसकता रह गया और मर गये फ़रहाद-ओ-क़ैस;
क्या उन्हीं दोनों के हिस्से में क़ज़ा थी, मैं न था।