कभी नजरे मिलाने में...
कभी नजरे मिलाने में जमाने बीत जाते है;
कभी नजरे चुराने में जमाने बीत जाते है;
किसी ने आँखे भी ना खोली तो सोने की नगरी में;
किसी को घर बनाने में जमाने बीत जाते है;
कभी काली सियाह राते हमें एक पल की लगती है;
कभी एक पल बिताने में ज़माने बीत जाते है;
कभी खोला दरवाजा सामने खड़ी थी मंजिल;
कभी मंजिल को पाने में जमाने बीत जाते है;
एक पल में टूट जाते है, उम्र भर के वो रिश्ते;
जिन्हें बनाने में जमाने बीत जाते है।
उन्होंने देखा और हमारे आंसू गिर पड़े;
भारी बरसात में जैसे फूल बिखर पड़े;
दुःख यह नहीं कि उन्होंने हमें अलविदा कहा;
दुःख तो ये है कि उसके बाद वो खुद रो पड़े।
कलम चलती है तो दिल की आवाज़
लिखता हूँ,
गम और जुदाई के अंदाज़ इ बयान
लिखता हूँ,
रुकते नहीं हैं मेरी आँखों से आंसू,
मैं जब भी उसकी याद में अलफ़ाज़
लिखता ह
तन्हा हो कभी तो मुझे ढूंढ लेना;
इस दुनियां से नहीं अपने दिल से पूछ लेना;
आपके आस पास ही कहीं रहते हैं हम;
यादों से नहीं तो साथ गुज़ारे लम्हों से पूछ लेना।
तेरे बगैर इस ज़िन्दगी की हमें जरुरत नहीं;
तेरे सिवा हमें किसी और की चाहत नहीं;
तुम ही रहोगे हमेशा मेरे दिल में;
किसी और को इस दिल में आने की इजाज़त नहीं।