कितनी अजीब बात है ना जब तू मेरे पास थी तो,
हर दम ये सोचता था की क्या में तेरी कदर नहीं करता
और आज तू मेरे पास नहीं है तो है तो ये एहसास होता है की,
कदर तो हमेशा से थी मगर तुजे न खोने के यकीन ने अँधा कर दिया था.
क्यूँ तबीअत कहीं...
क्यूँ तबीअत कहीं ठहरती नहीं;
दोस्ती तो उदास करती नहीं;
हम हमेशा के सैर-चश्म सही;
तुझ को देखें तो आँख भरती नहीं;
शब-ए-हिज्राँ भी रोज़-ए-बद की तरह;
कट तो जाती है पर गुज़रती नहीं;
ये मोहब्बत है, सुन, ज़माने, सुन;
इतनी आसानियों से मरती नहीं;
जिस तरह तुम गुजारते हो फ़राज़;
जिंदगी उस तरह गुज़रती नहीं।
उलझी हुई दुनीयां को पाने
की जिद्द करो,
जो ना हो अपना उसे अपनाने की जिद्द करो,
इस समंदर में तुफान बहुत आते है तो क्या हुआ,
इसके साहिल पे घर बनाने की जिद्द करो...
khan
ख्याल में वो...
ख्याल में वो, बेसुरती में वो;
आँखों में वो, अक्स में वो;
ख़ुशी में वो, दर्द में वो;
आब में वो, शराब में वो;
लाभ में वो, बेहिसाब में वो;
मेरे अब हो लो, या जान मेरी लो।
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जब से देखा ह तेरी आखो:eyes: मे झाक कर आईना:mag: अच्छा नही :smirk:लगता मोहब्बत:two_hearts: मे ऐसे हुए ह दीवाने तुम्हें कोई देखे:sunglasses:,तो अच्छा नहीं :smirk:लगता