कल जो मैंने एक बच्चे से पूछा: पढ़ाई कैसी चल रही है? उसका जवाब आया अंकल, समंदर जितना सिलेबस है; नदी जितना पढ़ पाते हैं; बाल्टी जितना याद होता है; गिलास भर लिख पाते हैं; चुल्लू भर नंबर आते हैं; उसी में डूब कर मर जाते हैं। :fallen_leaf::sleepy::fallen_leaf::innocent::palm_tree::stuck_out_tongue_closed_eyes::ocean::rage::heavy_dollar_sign:
*समुद्र सभी के लिए एक ही है ... पर...,* *कुछ उसमें से मोती ढूंढते है ..* *कुछ उसमें से मछली ढूंढते है ..* *और, कुछ सिर्फ अपने पैर गीले करते है..,* *ज़िदगी भी... समुद्र की भांति ही है,* *यह सिर्फ हम पर ही निर्भर करता है, कि, इस जीवन रुपी समुद्र से हम क्या पाना चाहते है, हमें क्या ढूंढ़ना है ?*
होली का रंग तो कुछ ही पलों में धूल जायेगा पर दोस्ती और प्यार का रंग नहीं धूल पायेगा यही तो हैं, असली रंग हमारी ज़िन्दगी के.. जितना रंगोगे उतना गहरा होता ही जायेगा