वो तो भला हो मुकेश जी का, वरना नोटबन्दी की इस कंगाली में कितनो का व्हाट्सप्प चलाना भी बन्द हो गया होता। . . मुकेश जी ज़िंदाबाद :joy::joy::joy::joy::laughing::laughing::laughing::laughing:
यह होती है बिना पत्नी वाले की हिम्मत ।
नोट ही बदल डाले
साले शादीशुदा तो टी वी का चेनल तक भी नही बदल सकते।
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जब तक आर्थिक हालात सुधर नही जाते।इस बीच किसी को भी पैसो की तंगी महसुस हो। तो घबराये नहीं। आत्महत्या जैसे कदम ना उठाये। :grinning::grinning::grinning:सीधे अपने अपने ग्रुप के एडमिन के घर पहुच जाये। आपके और आपके परिवार को 30 Dec.तक खान पान की सुविधा मुफ़्त में दी जायेगी। एडमिन कभी भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होते। एडमिन सबको ले कर चलने का नाम है। :grinning::grinning::grinning:इतने बड़ी उपाधि और ओहदा कुछ तो काम आना ही चाहिए:footprints::footprints::grinning:सभी शांति बनाये रखे घबराये नहीं:grinning::grinning:बोलो एडमिन की जय
बरसों बाद एक दोस्त मिला मैंने पूछा - कैसे हो यार ! क्या कर रहे हैं तेरे बच्चे आजकल !
वह बोला - बड़ा छोरा ICICI में लग गया, लाड़ी SBI में...... छोटा छोरा HDFC में है, उसकी वाइफ कैनरा बैंक में, सबसे छोटी लड़की की शादी नहीं हुयी, Axis बैंक में लगवा दिया मैंने।
मैंने कहा - सब को अच्छा बैंक जॉब में सेटल कर दिया आपने।
वो बोला - जॉब कहाँ रे ! नोट चेंज कराने लाइन में लगाया है :grin::grin::grin::grin: