“समय बहाकर ले जाता है नाम और निशान कोई हम में रह जाता है कोई अहम में रह जाता है बोल मीठे ना हों तो हिचकियाँ भी नहीं आती घर बड़ा हो या छोटा अगर मिठास ना हो तो इंसान क्या चींटियां भी नहीं आती”
*कमी हो तो अच्छे आचरण से* *पूरी की जा सकती है ।* *पर अच्छे आचरण की कमी हो* *तो वह सुंदरता से पूरी नही* *की जा सकती ।।* *याद रहे, जिस वक्त हम किसी* *का अपमान कर रहे होते है* *उस वक्त हम अपना* *सम्मान खो रहे होते है...,*
*अच्छा वक़्त उसी का होता हैं...* *जो किसी का बुरा नहीं सोचते हैं...*
*श्री कृष्ण जी कहते *मत सोच की तेरा* *सपना क्यों पूरा नहीं होता* *हिम्मत वालो का इरादा* *कभी अधुरा नहीं होता* *जिस इंसान के कर्म* *अच्छे होते है* *उस के जीवन में कभी* *अँधेरा नहीं होता* ..
किसी की "सलाह" से रास्ते जरूर मिलते हैं, पर मंजिल तो खुद की "मेहनत" से ही मिलती है ! "प्रशंसक" हमें बेशक पहचानते होंगे.. मगर "शुभचिन्तकों" की पहचान खुद को करनी पड़ती है