एक छोटा किराना वाला,दूध वालाऔर सब्जी वाला आज भी तुमको उधार देने को तैयार है। आज देश में पैसा नहीं चल रहा पर एक भरोसे का व्यवहार चल रहा है ।ये भरोसे का व्यवहार उन छोटे दुकानदारों पे हमेशा रखना क्यों की हम ही एक दूसरे के पूरक है ये मोल या ऑनलाइन वाले नहीं
“समय बहाकर ले जाता है नाम और निशान कोई हम में रह जाता है कोई अहम में रह जाता है बोल मीठे ना हों तो हिचकियाँ भी नहीं आती घर बड़ा हो या छोटा अगर मिठास ना हो तो इंसान क्या चींटियां भी नहीं आती”
मेरा तो एक ही छोटा सा सूत्र है, छोटा सा संदेश है: भीतर डुबकी मारो। जितने गहरे जा सको, जाओ - अपने में। वही पाओगे जो पाने योग्य है। और उसे पाकर निशिचत ही बांट सकोगे। पृथ्वी तुम्हारे हंसी के फूलों से भर सकती है।।।
*एक महात्मा से मुलाक़ात हुई, तो मैंने गुज़ारिश की.. .... जिंदगी की कोई नसीहत दीजिये मुझे....* *उन्होंने सवाल किया, कभी बर्तन धोये हैं * *मैने हैरान होकर कहा, ....... जी धोये हैं।*
*पुछा,....क्या सीखा * *मैंने कोई जवाब नही दिया...* *वो मुस्कुराये और कहा.........* *"बर्तन को बाहर से कम और* *अंदर से ज्यादा धोना पड़ता है.......* *बस यही जिंदगी है।*
मन की आंखो से प्रभु का दीदार करो दो पल का है अन्धेरा बस सुबह का *इन्तजार करो क्या रखा है आपस के बैर मे ए यारो छोटी सी है ज़िंदगी बस *हर किसी से प्यार करो *