कहाँ से लाऊ हुनर उसे मनाने का;
कोई जवाब नहीं था उसके रूठ जाने का;
मोहब्बत में सजा मुझे ही मिलनी थी;
क्यूंकी जुर्म मैंने किया था उससे दिल लगाने का।
Sirf Najdikiyo Se Mohabbat Hua Nahi Karti,
Fasle Jo Dilon Me Ho To Fir Chahat Hua Nhi Karti
Agar Naraz Ho Khafa Ho To Shikayat Karo Hamse
Khamosh Rahne Se Dilo Ki Duriya Mita Nhi Karti
एक अजीब सी हरकत हो गयी है तेरे जाने के बाद, हमें भुख ही नहीं लगती खाना खाने के बाद, मेरे पास 8 समोसे थे जो मैने खा लिए, 1 तेरे आने से पहले 7 तेरे जाने के बाद, नींद ही नहीं आती मुझे सोने के बाद, नजर कुछ नहीं आता आँखें बंद होने के बाद, डाक्टर से पुछा इसका इलाज, देकर 4 टैबलेट बोला, खा लेना 2 जागने से पहले 2 सोने के बाद
सुबह रो-रो के...
सुबह रो-रो के शाम होती है;...
शब तड़प कर तमाम होती है;
सामने चश्म-ए-मस्त साक़ी के;
किस को परवाह-ए-जाम होती है;
कोई ग़ुंचा खिला के बुल-बुल को;
बेकली ज़र-ए-दाम होती है;
हम जो कहते हैं कुछ इशारों से;
ये ख़ता ला-कलाम होती है।
आँखों के इंतज़ार को दे कर हुनर चला गया;
चाहा था एक शख़्स को जाने किधर चला गया;
दिन की वो महफिलें गईं, रातों के रतजगे गए;
कोई समेट कर मेरे शाम-ओ-सहर चला गया;
झोंका है एक बहार का रंग-ए-ख़याल यार भी;
हर-सू बिखर-बिखर गई ख़ुशबू जिधर चला गया;
उसके ही दम से दिल में आज धूप
भी चाँदनी भी है;
देके वो अपनी याद के शम्स-ओ-क़मर चला गया;
कूचा-ब-कूचा दर-ब-दर कब से भटक रहा है दिल;
हमको भुला के राह वो अपनी डगर चला गया।
अब तो अपनी तबियत भी कुछ जुदा सी लगती है;
सांस लेता हूँ तो ज़ख्मों को हवा सी लगती है;
कभी राज़ी तो कभी मुझसे खफा सी लगती है;
ज़िंदगी तु ही बता कि तु मेरी क्या लगती है।
✵➥ बेवफा तेरा :bride_with_veil: मासुम ☜ चेहरा भुल जाने के ➣ काबिल :negative_squared_cross_mark: नहीं ••
तु :bride_with_veil: बहुत ➪ खुबसूरत :ok_hand_tone1:है लेकिन दिल :heart_decoration: लगाने के काबिल नहीं..||•||:ribbon::two_women_holding_hands::flags:||•||