जो गुमां करे इस नक्श पे, वो अक्स भी एक खाक है
जिस सादगी में नूर हो, वो हुस्न ही मेहताब है
जिस नजर में खुमार हो,जो जिगर से जांनिसार हो
जिसे जलके ही करार हो, वो इश्क ही आफताब है
दर्द जब हद से गुजर जाता हूँ तो रो लेता हूँ;
जब किसी से कुछ कह
नहीं पता तो रो लेता हूँ;
यूँ तो मेला हैं चारों तरफ हमारे, लोगों का मगर;
जब कोई अपना नजर नहीं आता तो रो लेता हूँ।
ओंस की बूँद सी...
ओंस की बूँद सी होती है बेटियाँ;
स्पर्श खुरदरा हो तो रोती हैं बेटियाँ;
रोशन करेगा बेटा तो एक कुल को;
दो दो कुलो की लाज होती हैं बेटियाँ;
कोई नहीं है एक दूसरे से कम;
हीरा अगर है बेटा;
तो सुच्चा मोती है बेटियाँ;
काँटों की राह पर यह खुद ही चलती हैं;
औरों के लिए फूल होती हैं बेटियाँ;
विधि का विधान है;
यही दुनियाँ की रस्म है;
मुट्ठी भर नीर सी होती हैं बेटियाँ।
वो मेहँदी वाले हाथ मुझे दिखा के रोये;
अब मैं हूँ किसी और की हूँ मुझे ये
बता के रोये;
पहले कहते थे
कि नहीं जी सकते तेरे बिन;
आज फिर वही बात वो दोहरा के रोये;
कैसे कर लूं उनकी मोहब्बत पे शक यारों;
वो भरी महफ़िल में मुझे गले लगा के रोये।