प्यास वो दिल की...
प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं;
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं;
बेरुख़ी इस से बड़ी और भला क्या होगी;
एक मुद्दत से हमें उस ने सताया भी नहीं;
रोज़ आता है दर-ए-दिल पे वो दस्तक देने;
आज तक हमने जिसे पास बुलाया भी नहीं;
सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने;
वो फ़साना जो कभी हमने सुनाया भी नहीं;
तुम तो शायर हो क़तील और वो इक आम सा शख़्स;
उस ने चाहा भी तुझे और जताया भी नहीं।
मेरी गली से वो जब भी गुज़रता होगा;
मोड़ पे जा के कुछ देर ठहरता होगा;
भूल जाना मुझको इतना आसान तो न होगा;
दिल में कुछ तो टूट के उसके भी बिखरता होगा।
✵➥ बेवफा तेरा :bride_with_veil: मासुम ☜ चेहरा भुल जाने के ➣ काबिल :negative_squared_cross_mark: नहीं ••
तु :bride_with_veil: बहुत ➪ खुबसूरत :ok_hand_tone1:है लेकिन दिल :heart_decoration: लगाने के काबिल नहीं..||•||:ribbon::two_women_holding_hands::flags:||•||
यूँ तो घुट जाएगा दम कुछ हवा तो आने दो
तोड़ दे जो ख़ामोशी वो सदा तो आने दो
छोड़ देंगें साथ सब जिनकों समझा हमसफ़र
पेश राहों में कोई वाकि़आ तो आने दो
कुछ जुदा तुमसे रहे, कुछ क़दम तन्हा चलें
दरमियां अपने ज़रा फ़ासिला तो आने दो
ढूँढ लेंगें कितने ही रास्ते और मंज़िलें
इस बियाबां में नज़र नक़्शे-पा तो आने दो
हम अकेले ही सही मगर चलते रहे
ये न कहते थे कोई क़ाफ़िला तो आने दो......
मेरी आँखों में...
मेरी आँखों में आँसू आए ना होते;
अगर वो हमें देखकर मुस्कुराए ना होते;
सोचता हूँ अक्सर तन्हाई में मैं;
मेरी ज़िंदगी में काश वो आए ना होते;
ना तड़पते हम उनके लिए इतना;
दिल ने ख़्वाब अगर उनके सजाए ना होते;
ना टूट कर बिखरता मैं इस कदर;
अगर वो मेरे दिल में अपना घर बसाए ना होते।
बहुत महंगे किराए के मकाँ से;
चलो आओ चलें अब इस जहां से;
यूँ ही तुम थामे रहना हाथ मेरा;
हमे जाना है आगे आसमां से;
ये तुम ही हो मेरे हमराह वरना;
मेरे पैरों में दम आया कहाँ से;
मेरी आँखों से क्या ज़ाहिर नहीं था;
मैं तेरा नाम क्या लेता जुबां से।
हवा का ज़ोर
भी काफ़ी बहाना होता है;
अगर चिराग किसी को जलाना होता है;
ज़ुबानी दाग़ बहुत लोग करते रहते हैं;
जुनूँ के काम को कर के दिखाना होता है;
हमारे शहर में ये कौन अजनबी आया;
कि रोज़ सफ़र पे रवाना होता है;
कि तू भी याद नहीं आता ये
तो होना था;
गए दिनों को सभी को भुलाना होता है।