"सोने में जब जड़ कर हीरा, आभूषण बन जाता है, वह आभूषण फिर सोने का नही, हीरे का कहलाता है। काया इंसान ही सोना है और, कर्म हीरा कहलाता है, कर्मो के निखार से ही, मूल्य सोने का बढ़ जाता है।
मन की आंखो से प्रभु का दीदार करो दो पल का है अन्धेरा बस सुबह का *इन्तजार करो क्या रखा है आपस के बैर मे ए यारो छोटी सी है ज़िंदगी बस *हर किसी से प्यार करो *