किस रिश्ते में किस अंग में रंग लगायें :- 1-माता – पैर , 2-पिता-सीने पर , 3-पत्नी / पति – सर्वांग , 4-बड़ा भाई -मस्तक , 5-छोटा भाई – भुजायें, 6-बड़ी बहन – हाथ और पीठ, 7-छोटी बहन – गाल, 8-बड़ी भाभी / देवर – हाथ और पैर (ननद और देवरानी को खुली छूट ) 9-छोटी भाभी -सर और कन्धे (ननद खुली छूट ) 10-चाची / चाचा – सर से रंग उड़ेले , 11-साले सरहज – जी भरके पटकी पटका होने के पहले तक। 12-ताई / ताऊ – पैर और माथे पर , 13-मामा / मामी – बच कर जाने न पायें , 14-बुआ / फूफा – जी भर कर रंग लगायें, 15-मौसी , / मौसा – डिस्टेन्स मेन्टेन करके रंग लगायें , 16-पड़ोसी सिर्फ सूखा रंग ही लगायें उसमें इत्र जरुर डालें , 17-मित्र – मर्यादायें भूल कर रंग लगायें , 18-बॉस – माथे पर टिका लगायें , 19-बॉस की पत्नी – हाथ में रंग का पैकेट देकर नमस्कार कर लें , शिष्टाचार की सीमा के अन्दर रंग लगायें , अनजाने व्यक्तियों को – सामाजिक मर्यादा और शिष्टाचार का पूरा ध्यान रखें | रंगों का त्योहार आपके लिए आनंदोत्सव साबित हो।
नदी का पानी मीठा होता है क्योंकि वो पानी देती रहती है। सागर का पानी खारा होता है क्योंकि वो हमेशा लेता रहता है। नाले का पानी हमेशा दुर्गंध देता है क्योंकि वो रूका हुआ होता है।
यही जिंदगी है
देते रहोगे तो सबको मीठे लगोगे। लेते रहोगे तो खारे लगोगे। और अगर रुक गये तो सबको बेकार लगोगे।
जीवन में सुख हो या दुख, सम्मान या अपमान, अंधेरा या उजाला, भीतर के तराजू को साधते चला जाए कोई, तो एक दिन उस परम संतुलन पर आ जाता है, जहां जीवन तो नहीं होता, अस्तित्व होता है; जहां लहर नहीं होती, सागर होता है; जहां 'मैं' नहीं होता, 'सब' होता है। " ~ ~ ओशो ...