Movies Titles Related To Engg
Students:
Exams – Socha Na Tha
Classes – Kabhi Kabhi
Question Papers – Na Tum Jano
Na Hum
Copying – Yaarana
Maths 2 – Asambhav
Maths 1 – Mission Impossible
Environmental Sciences – Pyaar
Mein Kabhi Kabhi
1st Semester – Kuch To Hai
2nd semester – Ye Kya Ho
Raha Hai
Distinction – Kal Ho Na Ho
1st Class – Raju Ban Gaya
Gentleman
2nd Class – Dil Mange More Fail – Phir Milenge..
Waris ali
Touching story :
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A boy and girl went for a walk.
While walking, boy hits his leg to a stone and starts bleeding.
He looks at her hoping that she would tear her dupata and wrap it around his leg.
She looks in his eyes and says..
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KAMINEY“Soch bhi mat! Designer suit hai..!”dekh kar nahi chal sakte kya??
Kisi shayar ne"Maut"ko
kya khoob kaha:
"Zindagi me do minute koi
mere
paas na baitha..
aaj sab mere paas baithe
ja rahe the..
koi tohfa na mila aaj tak
mujhe,
aaj phool hi phool diye ja
rahe the..
taras gye hum kisi ke
hath se diye
ek libaj ko,
aaj nye-nye kapde
odhaye ja rahe the..
Do kadam sath na chalne
ko tayar
tha koi,
aaj kafila banakar ja rahe
the..
Aaj pata chala
ke'MAUT'itni hasin hoti
hai,
Kambhakt"HUM"to yu hi
jiyeja rahe the...:))
बिटिया बड़ी हो गयी, एक रोज उसने बड़े सहज भाव में अपने पिता से पूछा - "पापा, क्या मैंने आपको कभी रुलाया" ?
पिता ने कहा -"हाँ "
उसने बड़े आश्चर्य से पूछा - "कब" ?
पिता ने बताया - 'उस समय तुम करीब एक साल की थीं, घुटनों पर सरकती थीं। मैंने तुम्हारे सामने पैसे, पेन और खिलौना रख दिया क्योंकि मैं ये देखना चाहता था कि, तुम तीनों में से किसे उठाती हो तुम्हारा चुनाव मुझे बताता कि, बड़ी होकर तुम किसे अधिक महत्व देतीं। जैसे पैसे मतलब संपत्ति, पेन मतलब बुद्धि और खिलौना मतलब आनंद।
मैंने ये सब बहुत सहजता से लेकिन उत्सुकतावश किया था क्योंकि मुझे सिर्फ तुम्हारा चुनाव देखना था।
तुम एक जगह स्थिर बैठीं टुकुर टुकुर उन तीनों वस्तुओं को देख रहीं थीं। मैं तुम्हारे सामने उन वस्तुओं की दूसरी ओर खामोश बैठा बस तुम्हें ही देख रहा था। तुम घुटनों और हाथों के बल सरकती आगे बढ़ीं, मैं अपनी श्वांस रोके तुम्हें ही देख रहा था और क्षण भर में ही तुमने तीनों वस्तुओं को आजू बाजू सरका दिया और उन्हें पार करती हुई आकर सीधे मेरी गोद में बैठ गयीं। मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि, उन तीनों वस्तुओं के अलावा तुम्हारा एक चुनाव मैं भी तो हो सकता था। तभी तुम्हारा तीन साल का भाई आया ओर पैसे उठाकर चला गया,
वो पहली और आखरी बार था बेटा जब, तुमने मुझे रुलाया और बहुत रुलाया...
भगवान की दी हुई सबसे अनमोल धरोहर है बेटी...
क्या खूब लिखा है एक पिता ने...
हमें तो सुख मे साथी चाहिये दुख मे तो हमारी बेटी अकेली ही काफी है… . पोस्ट पसंद आया हो तो शेयर जरूर करें.......
A girl loves her boy very much & asked him to marry her:
Boy: No sorry, Im marrying someone else..
Girl: Oh, I wish u very best of luck and stay happy,
I will move on.
Boy: No pls be my friend,
I need u..
Girl: That’s the problem u need me,
but u don’t want me..
Im sorry i cant be ur friend anymore.
*जलाराम एक बहुत बड़े दानवीर थे। उनकी ये एक खास बात थी कि जब वो दान देने के लिए हाथ आगे बढ़ाते तो अपनी नज़रें नीचे झुका लेते थे।*
*ये बात सभी को अजीब लगती थी कि ये जलाराम कैसे दानवीर हैं। ये दान भी देते हैं और इन्हें शर्म भी आती है।*
*ये बात जब कबीर जी तक पहुँची तो उन्होंने जलाराम को चार पंक्तियाँ लिख भेजीं जिसमें लिखा था* -
*ऐसी देनी देन जु* *कित सीखे हो सेन।* *ज्यों ज्यों कर ऊँचौ करौ* *त्यों त्यों नीचे नैन।।*
*इसका मतलब था कि जलाराम तुम ऐसा दान देना कहाँ से सीखे हो? जैसे जैसे तुम्हारे हाथ ऊपर उठते हैं वैसे वैसे तुम्हारी नज़रें तुम्हारे नैन नीचे क्यूँ झुक जाते हैं?*
*जलाराम ने इसके बदले में जो जवाब दिया वो जवाब इतना गजब का था कि जिसने भी सुना वो जलाराम का कायल हो गया।* *इतना प्यारा जवाब आज तक किसी ने किसी को नहीं दिया।*
*जलाराम ने जवाब में लिखा* -
*देनहार कोई और है* *भेजत जो दिन रैन।* *लोग भरम हम पर करैं* *तासौं नीचे नैन।।*
*मतलब, देने वाला तो कोई और है वो मालिक है वो परमात्मा है वो दिन रात भेज रहा है। परन्तु लोग ये समझते हैं कि मैं दे रहा हूँ जलाराम दे रहा है। ये सोच कर मुझे शर्म आ जाती है और मेरी आँखें नीचे झुक जाती हैं।*:pray::pray:
Ek Din Unse Hum Bahut Door Chale Jayenge,
Satayengi Hamari Yadein Har Taraf Unhe
Or Wo Pareshan Ho Jayenge,
Charon Taraf Dekhenege Par Hum Na
Nazar Aayenge,
Jab Satayengi Hamari Yadein
Wo Hamse Milne Ko Betab Ho Jayenge
Wadiyon Se Poochenge Hamara Pata
Par Hum Kaha Unhe Mil Payenge,
Yaad Ayengi Unko Hamari Wafaein
Unki Aankhon Me Aansu Aa Jayenge,
Dhoondenge Wo Ek Pyar Bhare Ehsaas
Ko Samundar Rahe Bhale Hi Wo Pyase Reh Jayenge,
Ek Din Ham Unse Bahut Door Chale Jayenge
Kasamkhan
Gandhi Ji Ki Ek Rishtedar Aurat Ke Bete Par Qatal Ka Ilzam Laga.
Aurat Ne Gandhi Ji Se Request Ki Ke Mere Begunah Bete Ko Bacha Lo.
Gandhi Ji Ne Muqadma Lada Aur Ladke Ko Bacha Liya
Aurat Badi Khush Hui, Par Usne Ek Sawal Kiya.
Aurat: “Aaj To Aap Hain Jo Bacha Liya, Kal Jab Aap Nahi Honge To Hum Bekasoor Logo Ko Kon Bachayega?”
Gandhi Ji Ne Muskurate Hue Bahut Hi Khubsoorat Jawab Diya
“Note Pe Lagi Meri Photo“
*एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी..।*
*वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी, जिसे कोई भी ले सकता था..।*
*एक कुबड़ा व्यक्ति रोज़ उस रोटी को ले जाता और बजाय धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा..।"*
*दिन गुजरते गए और ये सिलसिला चलता रहा..*
*वो कुबड़ा रोज रोटी लेके जाता रहा और इन्ही शब्दों को बड़बड़ाता - "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.।"*
*वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन खुद से कहने लगी की-"कितना अजीब व्यक्ति है,एक शब्द धन्यवाद का तो देता नहीं है, और न जाने क्या-क्या बड़बड़ाता रहता है, मतलब क्या है इसका.।"*
*एक दिन क्रोधित होकर उसने एक निर्णय लिया और बोली-"मैं इस कुबड़े से निजात पाकर रहूंगी।"*
*और उसने क्या किया कि उसने उस रोटी में ज़हर मिला दिया जो वो रोज़ उसके लिए बनाती थी, और जैसे ही उसने रोटी को को खिड़की पर रखने कि कोशिश की, कि अचानक उसके हाथ कांपने लगे और रुक गये और वह बोली- "हे भगवन, मैं ये क्या करने जा रही थी.?" और उसने तुरंत उस रोटी को चूल्हे कि आँच में जला दिया..। एक ताज़ा रोटी बनायीं और खिड़की के सहारे रख दी..।*
*हर रोज़ कि तरह वह कुबड़ा आया और रोटी ले के: "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा" बड़बड़ाता हुआ चला गया..।*
*इस बात से बिलकुल बेख़बर कि उस महिला के दिमाग में क्या चल रहा है..।*
*हर रोज़ जब वह महिला खिड़की पर रोटी रखती थी तो वह भगवान से अपने पुत्र कि सलामती और अच्छी सेहत और घर वापसी के लिए प्रार्थना करती थी, जो कि अपने सुन्दर भविष्य के निर्माण के लिए कहीं बाहर गया हुआ था..। महीनों से उसकी कोई ख़बर नहीं थी..।*
*ठीक उसी शाम को उसके दरवाज़े पर एक दस्तक होती है.. वह दरवाजा खोलती है और भोंचक्की रह जाती है.. अपने बेटे को अपने सामने खड़ा देखती है..।*
*वह पतला और दुबला हो गया था.. उसके कपडे फटे हुए थे और वह भूखा भी था, भूख से वह कमज़ोर हो गया था..।*
*जैसे ही उसने अपनी माँ को देखा, उसने कहा- "माँ, यह एक चमत्कार है कि मैं यहाँ हूँ.. आज जब मैं घर से एक मील दूर था, मैं इतना भूखा था कि मैं गिर गया.. मैं मर गया होता..।*
*लेकिन तभी एक कुबड़ा वहां से गुज़र रहा था.. उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया.. भूख के मरे मेरे प्राण निकल रहे थे.. मैंने उससे खाने को कुछ माँगा.. उसने नि:संकोच अपनी रोटी मुझे यह कह कर दे दी कि- "मैं हर रोज़ यही खाता हूँ, लेकिन आज मुझसे ज़्यादा जरुरत इसकी तुम्हें है.. सो ये लो और अपनी भूख को तृप्त करो.।"*
*जैसे ही माँ ने उसकी बात सुनी, माँ का चेहरा पीला पड़ गया और अपने आप को सँभालने के लिए उसने दरवाज़े का सहारा लीया..।*
*उसके मस्तिष्क में वह बात घुमने लगी कि कैसे उसने सुबह रोटी में जहर मिलाया था, अगर उसने वह रोटी आग में जला के नष्ट नहीं की होती तो उसका बेटा उस रोटी को खा लेता और अंजाम होता उसकी मौत..?*
*और इसके बाद उसे उन शब्दों का मतलब बिलकुल स्पष्ट हो चूका था-* *जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा,और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा।।*
*" निष्कर्ष "* ========== *हमेशा अच्छा करो और अच्छा करने से अपने आप को कभी मत रोको, फिर चाहे उसके लिए उस समय आपकी सराहना या प्रशंसा हो या ना हो..।* ==========
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मैं आपसे दावे के साथ कह सकता हूँ कि ये बहुत से लोगों के जीवन को छुएगी व बदलेगी.:pray::blush:
Tum dil ki baatein kya samjho
Tum Dil ka lagana kya jano,
Tum Aag lagana sikh gaye
Tum Aag bujhana kya jano,
Ek Baar agr tum rooth gaye
Hum tum ko mana hi lenge par
Hum tum se kabhi jo rooth gaye
Tum hamko manana kya jano,
Kuch saath chale kuch chhor gaye
Saathi to banate rahte ho
Tum saath nibhana kya jano.
..Must read..
Pappu ki master se hui ladai
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Master ne ki Pappu ki dhulai
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Pappu ka garam hua khoon
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Gaya kabristan ar kabar pe master ke
photo tang k likh diya
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COMING SOON
by rahul mahato
Suraj chand sitare sab mujhse jalte hen
sagar badal barsat mujhse ye kehete hen tu kise chahta he, tu kese jita he, tu kitna rota he, q itna pitahe, usse yaad karta he,kya hua he tera , bas itna to bota k wo koun he jispe tu marta hei, aur hame bhul k haste haste pagal bana phirta hei.l
EK Baar Insan Ne Koyal Se,
Kaha Tu Kali Na Hoti To Kitni
Achhi Dikhti, Sagar Se Kaha
Tera Pani Khara Na Hota
To Kitna Achha Hota, Gulab Se
Kaha Tujme Kante Na Hote
Tho Kitna Achha Hota, Tab
Teeno 1 Sath Bole Ke Hai,
Insan Tujh Me Dusro Ki “Kamiya”
Dekhne Ki Adat Na Hoti To Tu
Kitna Achha Hota.
Ladka dost se :
yaar maine apni Girl Friend ko
Uski birthday pe apni behan ki
new diamond ring chori ker k gift de
di,
Dost (Thappad maar kar) :
kaminey Itni mehngi kharidi thi
maine
Ladka: saale marta kyun hai
tere ghar hi to wapis gayi hai
Ooh shit....
Story of M.A.T.H.S ...
Aaj se 300 saal pehle MATH bohot
masoom aur pyara tha.
Ek din kuch badmash students ne
MATHko
bohot mara yahan tak ki Math ki
aakhri Sans thi marte marte sab
students ko badua de gyi.
Aur Ye keh ker is dunia se chala gya k
mein to ja raha hoon lekin MATHS
M = Meri
A = Aatma
T = Tumhe
H = Hamesha
S = Satayegi
Aaj bhi math ki aatma bhatak rahi hai
aur saare students ko sata rahi hai aur
hamesha satati rahegi
Main Hi Wafa Nibha Na Saka,
Tujhe Chaha Mgr Bata Na Saka,
Teri Judai Me Subho Sham Roye Bahut,
Haan Mgr Tere Samne Anshu Baha Na Saka,
Tujhe Chaha Maine Saari Duniya Se Jyada
Haan Mgr Teri Dehliz Pe Sar jhuka Na Saka,
Upar Wale Ne Likh Di Thi Judai
Judai ki Lakir Haath Se Mita Na Saka,
Tere Baad Bahut Aayi Khushiyan
Mgr Kisi Bhi Khushi Par Muskura Na Saka,
Ek Hi Baat Rulati Hai Subho Sham
Jisko Chaha Usko Pa Na Saka...