होली का रंग तो कुछ ही पलों में धूल जायेगा पर दोस्ती और प्यार का रंग नहीं धूल पायेगा यही तो हैं, असली रंग हमारी ज़िन्दगी के.. जितना रंगोगे उतना गहरा होता ही जायेगा
गुस्सा तो तब आता है जब पूरी खाँसी भी सुनलो और बंदा फोन ना उठाए :slight_frown: :stuck_out_tongue_closed_eyes::stuck_out_tongue_closed_eyes::stuck_out_tongue_closed_eyes::stuck_out_tongue_closed_eyes::stuck_out_tongue_closed_eyes:
मेरा तो एक ही छोटा सा सूत्र है, छोटा सा संदेश है: भीतर डुबकी मारो। जितने गहरे जा सको, जाओ - अपने में। वही पाओगे जो पाने योग्य है। और उसे पाकर निशिचत ही बांट सकोगे। पृथ्वी तुम्हारे हंसी के फूलों से भर सकती है।।।