सुकून उतना ही देना, प्रभु जितने से जिंदगी चल जाए, औकात बस इतनी देना, कि, औरों का भला हो जाए, रिश्तो में गहराई इतनी हो, कि, प्यार से निभ जाए, आँखों में शर्म इतनी देना, कि, बुजुर्गों का मान रख पायें, साँसे पिंजर में इतनी हों, कि, बस नेक काम कर जाएँ, बाकी उम्र ले लेना, कि, औरों पर बोझ न बन जाएँ
मेरा तो एक ही छोटा सा सूत्र है, छोटा सा संदेश है: भीतर डुबकी मारो। जितने गहरे जा सको, जाओ - अपने में। वही पाओगे जो पाने योग्य है। और उसे पाकर निशिचत ही बांट सकोगे। पृथ्वी तुम्हारे हंसी के फूलों से भर सकती है।।।
“जिनके पास अपने हैं वो अपनों से झगड़ते हैं जिनका कोई नहीं अपना वो अपनों को तरसते हैं कल न हम होंगे न गिला होगा सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिललिसा होगा जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता लें जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा”
एक छोटा किराना वाला,दूध वालाऔर सब्जी वाला आज भी तुमको उधार देने को तैयार है। आज देश में पैसा नहीं चल रहा पर एक भरोसे का व्यवहार चल रहा है ।ये भरोसे का व्यवहार उन छोटे दुकानदारों पे हमेशा रखना क्यों की हम ही एक दूसरे के पूरक है ये मोल या ऑनलाइन वाले नहीं