. *जिन्दगी जब देती है,* *तो एहसान नहीं करती* *और जब लेती है तो,* *लिहाज नहीं करती*
*दुनिया में दो ‘पौधे’ ऐसे हैं* *जो कभी मुरझाते नहीं* *और* *अगर जो मुरझा गए तो* *उसका कोई इलाज नहीं।* *पहला –* *‘नि:स्वार्थ प्रेम’* *और* *दूसरा –* *‘अटूट विश्वास’*
“जिनके पास अपने हैं वो अपनों से झगड़ते हैं जिनका कोई नहीं अपना वो अपनों को तरसते हैं कल न हम होंगे न गिला होगा सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिललिसा होगा जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता लें जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा”