” इसी तरह से परिपक्व व्यक्ति की भी तीन पहचान होती है… पहली उसमें नम्रता होती है… दूसरे उसकी वाणी मे मिठास होता है और तीसरे उसके चेहरे पर आत्मविश्वास का रंग होता है….. ”
नदी का पानी मीठा होता है क्योंकि वो पानी देती रहती है। सागर का पानी खारा होता है क्योंकि वो हमेशा लेता रहता है। नाले का पानी हमेशा दुर्गंध देता है क्योंकि वो रूका हुआ होता है।
यही जिंदगी है
देते रहोगे तो सबको मीठे लगोगे। लेते रहोगे तो खारे लगोगे। और अगर रुक गये तो सबको बेकार लगोगे।